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📚 अग्नि पथ

अध्याय 9

Reprint 2025-26

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🌟 "अग्नि पथ" में आपका स्वागत है

हरिवंशराय बच्चन की कविता 'अग्नि पथ' एक प्रेरणादायक काव्य है जो मनुष्य को जीवन के कठिन मार्ग पर दृढ़ता से चलने की प्रेरणा देती है। यह कविता संघर्षमय जीवन को 'अग्नि पथ' के रूप में प्रस्तुत करती है और मनुष्य को यह संदेश देती है कि राह में सुख रूपी छाँह की चाह न कर अपनी मंजिल की ओर कर्मठतापूर्वक बढ़ते ही जाना चाहिए।

इस इंटरैक्टिव पाठ में हम कवि हरिवंशराय बच्चन के जीवन, उनकी कविता 'अग्नि पथ' का विस्तृत अध्ययन करेंगे। कविता के माध्यम से कवि के मूल विचारों और संदेशों को समझेंगे, जो आज भी उतने ही प्रासंगिक हैं।

👤 लेखक परिचय

हरिवंशराय बच्चन (1907 - 2003)

हरिवंशराय बच्चन का जन्म उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद शहर में 27 नवंबर 1907 को हुआ। 'बच्चन' इनका माता-पिता द्वारा प्यार से लिया जानेवाला नाम था, जिसे इन्होंने अपना उपनाम बना लिया था। बच्चन कुछ समय तक विश्वविद्यालय में प्राध्यापक रहने के बाद भारतीय विदेश सेवा में चले गए थे। इस दौरान इन्होंने कई देशों का भ्रमण किया और मंच पर ओजस्वी वाणी में काव्यपाठ के लिए विख्यात हुए।

बच्चन की कविताएँ सहज और संवेदनशील हैं। इनकी रचनाओं में व्यक्ति-वेदना, राष्ट्र-चेतना और जीवन-दर्शन के स्वर मिलते हैं। इन्होंने आत्मविश्लेषणवाली कविताएँ भी लिखी हैं। राजनैतिक जीवन के ढोंग, सामाजिक असमानता और कुरीतियों पर व्यंग्य किया है। कविता के अलावा बच्चन ने अपनी आत्मकथा भी लिखी, जो हिंदी गद्य की बेजोड़ कृति मानी गई।

बच्चन की प्रमुख कृतियाँ हैं : मधुशाला, निशा-निमंत्रण, एकांत संगीत, मिलन-यामिनी, आरती और अंगारे, टूटती चट्टानें, रूप तरंगिणी (सभी कविता-संग्रह) और आत्मकथा के चार खंड : क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक।

बच्चन साहित्य अकादमी पुरस्कार, सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार और सरस्वती सम्मान से सम्मानित हुए।

गतिविधि: कवि के बारे में चिंतन

हरिवंशराय बच्चन के जीवन और उनकी काव्य-यात्रा पर विचार कीजिए। आपके अनुसार, उनकी कविताओं की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं? आधुनिक संदर्भ में उनकी प्रासंगिकता पर अपने विचार व्यक्त कीजिए।

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📝 पाठ प्रवेश

प्रस्तुत कविता में कवि ने संघर्षमय जीवन को 'अग्नि पथ' कहते हुए मनुष्य को यह संदेश दिया है कि राह में सुख रूपी छाँह की चाह न कर अपनी मंजिल की ओर कर्मठतापूर्वक बिना थकान महसूस किए बढ़ते ही जाना चाहिए। कविता में शब्दों की पुनरावृत्ति कैसे मनुष्य को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है, यह देखने योग्य है।

यह कविता जीवन के कठिन मार्ग पर चलने वाले व्यक्ति के लिए एक प्रेरणा-स्रोत है। कवि ने 'अग्नि पथ' के माध्यम से यह दिखाया है कि जीवन में सफलता पाने के लिए कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है और इन कठिनाइयों से घबराकर रुकना नहीं चाहिए।

कविता में प्रयुक्त शब्दों की पुनरावृत्ति से एक तालबद्धता आती है जो पाठक को आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है। यह तकनीक कविता को और भी प्रभावशाली बनाती है।

गतिविधि: कविता के विषय पर चिंतन

कविता के मुख्य विषय और संदेश पर विचार कीजिए। आपके अनुसार, 'अग्नि पथ' क्या दर्शाता है? जीवन में इसकी प्रासंगिकता क्या है?

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कविता

प्रश्न अभ्यास

🎯 गतिविधियाँ

🎧 श्रवण गतिविधि

हरिवंशराय बच्चन के जीवन के बारे में पढ़िए और नोट्स बनाइए। फिर नीचे दिए गए प्रश्नों के सही उत्तर चुनें और एक कथात्मक विवरण लिखिए।

हरिवंशराय बच्चन के जीवन के महत्वपूर्ण तथ्य (सही विकल्प चुनें):

1. हरिवंशराय बच्चन का जन्म किस वर्ष हुआ था?
2. बच्चन का जन्म कहाँ हुआ था?
3. बच्चन की प्रसिद्ध कृति कौन सी है?

हरिवंशराय बच्चन के विचारों का वर्णन (एक विकल्प चुनें):

📢 वाचन गतिविधि

कविता 'अग्नि पथ' को ऊँचे स्वर में पढ़िए और इसके भाव को व्यक्त कीजिए। कविता में प्रयुक्त शब्दों की पुनरावृत्ति का प्रभाव कैसा है? अपने विचार अपने साथी से साझा कीजिए।

नोट: यह गतिविधि कक्षा में समूह में की जानी चाहिए।

✍️ विचार-चयन गतिविधि

कविता 'अग्नि पथ' में व्यक्त विचारों की वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर निम्नलिखित विकल्पों में से सबसे उपयुक्त विकल्प चुनें। निम्नलिखित बिंदुओं के आधार पर अपना उत्तर चुनें:

  • जीवन में संघर्ष का महत्व
  • दृढ़ संकल्प और कर्मठता
  • सुख-सुविधाओं का त्याग
  • मंजिल तक पहुँचने की इच्छा

कविता के विचारों की वर्तमान प्रासंगिकता (एक विकल्प चुनें)

📚 क्या आप जानते हैं?

हरिवंशराय बच्चन का असली नाम 'बच्चन' नहीं था। यह नाम उनके माता-पिता द्वारा प्यार से लिया जानेवाला नाम था, जिसे उन्होंने अपना उपनाम बना लिया था। 'बच्चन' शब्द का अर्थ है 'बच्चा' या 'छोटा बच्चा'।

बच्चन ने अपनी आत्मकथा चार खंडों में लिखी है: 'क्या भूलूँ क्या याद करूँ', 'नीड़ का निर्माण फिर', 'बसेरे से दूर', और 'दशद्वार से सोपान तक'। यह आत्मकथा हिंदी गद्य की बेजोड़ कृति मानी जाती है।

बच्चन को साहित्य अकादमी पुरस्कार, सोवियत भूमि नेहरू पुरस्कार और सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया गया था। उनकी कविताएँ आज भी पाठकों को प्रेरणा देती हैं।